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मास्टर का प्रेम

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यूँ तो मुझे पता है कि आप चुस्की लेने की उम्मीद में इसे पढ़ रहे हैं, और मेरी भी गनीमत इसी बात में  है की मै आपको मायूस न करूँ। हालाँकि कि मास्टर होने की मजबूरी के तहत मै अपनी रायचंदी में कोई कमिपेशी नहीं करूँगा इसलिए आप अगर आ ही गए है तो पूरा पढियेगा। मुगालता ही सही पर ब्रम्ह ज्ञान का दावा तो मै कर ही देता हूँ, अभी से।

प्रेम की परिभाषा के चक्कर में बड़े बड़े प्रेम का शिकार हो गए हैं इसलिए मैं सतर्कता पूर्वक इसकी परिभाषा किये बगैर इसके राहू की भांति मास्टरों के जीवन में आने की और इस विडम्बना कि विवेचना करता हूँ।

मास्टरी एक मजबूरी से लदी कौम है। मसलन, यदि कालेज में कलेजा थिरका देने वाला म्यूजिक चल रहा हो और आपको विद्द्यार्थियों पर निगरानी रखने की नौकरी दी गयी हो तो यातना और पशोपेश के दोहरे दर्द को समझना किसी गैर मास्टर व्यक्तितिव के बस में नहीं है। कुछ ऐसा ही दोहरा योग छेम तब होता है जब मास्टर को अपनी प्रेयसी के साथ किसी प्रेम प्रयुक्त जगह की तलाश करनी हो। इसका विस्ताविक विभेदन तब होता है जब मास्टर की प्रियसी किसी बड़े शहर की रहने वाली हो और उसको मास्टर होने की मजबूरियों का भान न हो। गाड…