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Showing posts from June, 2014

सिफ़र

एक 
जबतकमरहमकेअन्दरकाजख्मतजाहो, बसइतनाहीमेरेशान-ए-ख़मकातकाज़ाहो || जबभीमरूँबेरिवाजबेदस्तूरफ़नाहोजाऊं, यारोंकीमुहोब्बतसेयेदस्तूरलिहाजाहो|| केरखेंहोंफूलमहफूजसीनेमेंसलीकेसे, नमिलेकफ़न, नहोकब्रनकोईजनाजाहो||
दो 
यूँगुनगुनाहटबरसेकेहमतरबतरहोजाये, जिंदगीसिजदेपेहोऔरमौतबेअसरहोजाये|| हरशिकस्तहरमजबूरी कोमजबूरकरदें हम, इतनेसंगीनजुर्ममेंकैदयेजिगरहोजाये|| इतनीशिद्दतसेबुनेकिश्तीकातानाबना, केकुछलूटेलम्होंमेंउम्रबसरहोजाये|| होबसइतनीसीगुंजाईशइसनादाँदुनियामें, केवोपलकेंमूँदलेतोसिफ़र होजाये... <
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ज़मीन मेरी भी है

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ज़मीन मेरी भी हैहकीकत ये है की मेरी जान से ज्यादा आज वो लोहा कीमती है जो मेरी जमीन के नीचे मिलता है।जितेंद्र वर्मा"मै न समझ हूँ, गंवार हूँ, या अनपढ़ हूँ इस बात पर हँसा जा सकता है। आपकी हंसी से मेरे आत्मविश्वास पर चोट हो भी सकती है और हो सकता है की मै अपनी बात न भी रख पाऊं। पर आज मामला ये नहीं है, मामला ये है की अब आपको मेरी बात सुननी पड़ेगी। मुझे गलत या सही साबित करने के लिए आपको मुझसे सार्थक तर्क करना पड़ेगा। अब आप मुझे चिढ़ा कर या मुझसे मुह फेर कर नहीं जा सकते। मुझे बेचारा कह देने भर से आप न्यायसंगत नहीं हो जायेंगे… मेरा वाक्चातुर्य अब आपकी पेशानी में सल खींचे या नहीं पर मेरे सवाल आपकी पेशानी का राज तिलक फीका कर सकते है। इस लिए सावधान होकर सुने… 
ये ज़मीन मेरी है। इस लिए की मेरे पास सरकारी दस्तावेज नहीं है आप ये बात नहीं झुठला सकते कि मेरे सात पुस्ते यहीं दफन हैं। आपकी सरकार को जब इस जमीन की गर्भ में लोहा नहीं दिखा था तब से हम यहीं रहते हैं। ये जंगल हमसे टैक्स नहीं मांगते इस लिए कोई ऐसी रसीद नहीं है जो हमारे हक़ को आपके न्यायालय में साबित कर सके! और इस लिए ही हमारे हक़ की लड़ाई आपको बर्…