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Showing posts from January, 2015

तिरंगे के बीच का सबसे बेरंग कपड़ा

औपचारिकताओं की भीड़ में दिल की गहराई से कही गयी बातें घुम जातीं हैं| तकनिकी की इजाद इस आराम देही औपचारिकता के पैरों से कोई जन्मदिन, त्योहार या व्यापक घटना पर मार्मिक संवाद कुचल जाता है!  और फिर... अपने शब्दों को अपने होंठों में दबाये मैं असामाजिक घोषित हो जाता हूँ! खैर समाजी लबादे से भारी हुए ये तंज़ अब मेरी राह नहीं बदल पायेंगे| आप मुझे मेरे 'मैं ' हो जाने पर स्वीकार करें अन्यथा अलविदा!! 
२६ जनवरी २०१५ को कई ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिनके लिए महज़ वाल पर RIP चिपका देने से या तिरंगा लगा देने से या फिर उन्माद में वाह वाह कराह देने भर से ही सामाजिक दाइत्व खत्म नहीं हो जायेगा। आज वैश्विक तानाशाही के बीचोबीच नकली पौधों की फुलवारी में मामूली ही सही लेकिन अतिव्यापक बीज की रोपाई करने वाले एक 'विचारों का किसान' मर गया है। खासकर तब जब बबूल और धतूरे की खेती का राष्ट्रवादी अभियान राजपथ पर केंचुली बदल रहा था।  आज तिलस्मी जहाज से उतरे उस लोक के ईश्वर ने अलौकिक छटा बिखेर रक्खी थी। जिसके नविन वलित मैत्री के प्रकाश मुंज में दुश्मन के दुशमनो का भी आपस में दुश्मन हो जाना उस ईश्वर की रणभेरी को …

Inverse of Policy Paralysis

"Since the days ofIndira-is-India-and-India-is-Indirato this date ofNamo-Namo, Indian public being sold to either socialist economy, to secular politics, to this new combo of all-inclusive-Development-of-Hindu-nation. In the era of consumerism one only buys Combo pack. Narendra Modi was a combo pack of the big bazar called India." Jitendra Rajaram "Indian Socialist Fabric had been first offended when Bollywood Flicks agglomerated the anger of public by showing imported Chandeliers, Cars and Cigarettes etc. However when orphaned Prime Minister (Rajiv Gandhi) won the election, he hammered first nail in Nehru's Economy by exhilarating those wounds. He but wasn’t all that anarchic in his raj. He introduced telephone in the country of bullock-carts and Computers in the country of Lanterns. He was cursed saying "If one computer can work all in one minute equivalent to what one thousands of clerks can work for one hour than millions of poor Babus will become jobless! He…