10 जनपद के 13 सूत्र

"There is a difference between whom you like and to whom you will vote"



"भारत का सर्वोच्च राजनैतिक नेता यानि की प्रधानमंत्री  (जो की अमेरिका में राष्ट्रपति होता है या जर्मनी में चांसलर होता है) 10 जनपथ नईदिल्ली के पते पर निवास करता है| ये एक प्रथा मात्र है, इसे राष्ट्रपति भवन 1, रायसिना हिल्स,नईदिल्ली की तर्ज पर कोई संवैधानिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता|
एलन लिष्ट्मन (Allan Lichtman) ने सन 1981 में अमिरीकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की पर्व गणना केलिए 13 सूत्र गढ़े थे| इन सूत्रों के आधार पर उन्होंने 1981 से 2016 तक के सभी अमिरीकी राष्ट्रपति के चुनावों के नतीजों का सटीक अनुमान लगाये हैं| एलन लिष्टमन अमेरिकन यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री के अध्यापक हैं। ये भी दिलचस्प है कि इन सूत्रों की गड़ना में उन्हें एक भूकंप का पूर्वानुमान लगाने वाले गणितज्ञ ने विशेष मदद की थी।
इस लेख में इन तेरह सूत्रों को भारतीय आम चुनाव के सापेक्ष परखने की कोशिश की जा रही है| हलाकि भारतीय संसद का चुनाव अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव से बिलकुल भिन्य है लेकिन 2010 से 2014 के बीच हुए चुनावी प्रयोग ने इन सूत्रों के भारतीय में उपयोगी बना दिया है|   
2014 के पहले तक भारत के आम चुनाव संघीय हुआ करते थे, यानि की वो किसी एक व्यक्तित्व पर निर्भर न होकर पूरे दल के राजनैतिक चल-चलन पर निर्भर हुआ करते थे| जनता अपने सामाजिक, आर्थिक, जातिगत और छेत्रिय मूल्यों एवं आवश्यकताओं के अधार पर मतदान करती थी| मतदाता अपने प्रतिनीधि के चयन के दौरान किसी राष्ट्रवादी भावना को विशेष तरजीह नहीं देता था| लेकिन हर बात पे अमेरिका हो जाने की नसीहत देने वाले कॉर्पोरेट वर्ग ने (जिसमे कॉर्पोरेट में कार्यरत कर्मचारी भी शामिल है) आखिरकार 2014 के आम चुनाव को अमेरिकी तर्ज पर संघीय से बदलकर अध्यक्षीय कर दिया| सनद रहे की अमेरिका में संसद का और राष्ट्रपति का चुनवा सभी निकाय एवं गणराज्य चुनावों को संकुलित कर किया जाता है, लेकिन भारत में संसद सदस्य का चुनाव, विधानसभा सदस्य का चुनाव,शहरी एवं ग्रामीण निकायों के चुनाव बिलकुल स्वतंत्र और अलग-अलग समय किये जाते हैं| इन चुनावों में महिला और जाती आरक्षण का समीकरण भी अलग-अलग निर्धारित होता है| ऐसे में संघीय चुनाव का अधक्षीय चुनाव में बदले जाने का मतलब है की अब चुनाव जीतने के लिए एक इन्सान का चेहरा दिखा कर पूरे दल के चरित्र पर बुरका डाला जा सकता है| इस बदलाव को राजदीप सरदेसाई ने अपनी पुस्तक “2014: The Election That Changed India” में विस्तार से सम्पादित किया है|
इस अनाधिकारिक रूप से विकसित हुई चुनावी प्रणाली का लाभ सिर्फ केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को ही नहीं हुआ है बल्कि दिल्ली राज्य में एक नवीनवलित राजनीतिक पार्टी को भी अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक विजय प्राप्त हुई है| तथा सबसे नयी पार्टी होने के बावजूद ये देश की मुख्या राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो गयी| इस प्रणाली ने बिहार विधानसभा के चुनाव में अप्रत्याशित फर्क पैदा किया है| उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में तो अघोषित, अनाधिकारिक फिरभी प्रभावपूर्ण अध्यक्षीय चुनाव प्रणाली ने चौंकाने वाले नतीजे पेश किये|
यह भी विदित हो की, भारत का सबसे पुराना राजनीतिक दल अभीतक इस चुनावी प्रणाली में कोई विशेष कौशल हांसिल नहीं कर पाया है| हलाकि,आगामी गुजरात चुनाव में इस पार्टी को कमर कसते हुए देखा जा सकता है|
इस चुनाव सर्जरी के दूरगामी अंजाम क्या होंगे इस पर आशावादी होना जल्दबाजी है लेकिन इन चुनावों में जीत-हार के सूत्रों को अमेरिकी चश्मे से देखा जा सकता है|  एलन लिष्टमन के मुताबिक निम्नलिखित 13 सूत्रों में से 8 सूत्र यदि सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थन में हो जाये तो सत्ताधारी दल वापिस सरकार बना सकता है लेकिन 8 से एक भी कम सूत्र यदि सत्ताधीश पार्टी का समर्थन नहीं करती है  तो फिर सत्ता में वापसी असंभव है। उसी तरह यदि मुख्य विपक्षी पार्टी के हित मे यदि 5 सूत्र भी सत्यापित हो जाएं तो विपक्ष सत्ता में काबिज हो सकती है। लेकिन उसी स्थिति में जब मौजूदा सत्ताधारी पार्टी कम से कम 7 सूत्रों में विफल हो रही हो। सूत्र निम्न है...

1.क्या सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के सांसद दोनों सदनो में सबसे ज्यादा हैं?
2.क्या सत्ताधारी दल के पास कोई शक्तिशाली प्रधानमंत्री चेहरा नहीं है?
3. क्या सत्ताधारी दल का प्रधानमंत्री प्रत्याशी मौजूदा प्रधानमंत्री भी है?
4. क्या कोई शक्तिशाली तीसरा संघ है जो सत्ताधारी दल और विपक्षी दल को चुनौती देता महसूस हो रहा हो?
5. क्या चुनावी वर्ष में देश पर कोई आर्थिक संकट है?
6. क्या निकट भविष्य में देश की प्रति-व्यक्ति विकास दर में मजबूती की कोई सम्भावना है?
7. क्या मौजूदा व्यवस्था ने पिछले पांच वर्षों में कोई बड़ी परियोजना को पूर्ण किया है?
8. क्या फ़िलहाल कोई बड़ी क्रांति कया कोई दंगे जैसी घटनाये हुई हैं?
9. क्या सत्ता किसी बड़े घोटाले में फंसी है?
10. क्या मौजूदा सत्र में देश कोई युद्ध लड़ रहा है या लड़ चूका है?
11. क्या मौजूदा सत्र में कोई सामरिक उपलब्धि सरकार प्राप्त की है?
12. क्या सत्ता दल का प्रधानमंत्री प्रत्याशी अत्यंत लोकप्रिय नेता या राष्ट्रीय हीरो हैं?
13. क्या विपक्षी दल के पास कोई राष्ट्रीय हीरो और लोकप्रिय नेता नहीं है?

2014 के आम चुनाव में सत्ताधारी यूपीए गठबंधन लगभग इन सभी सूत्रों में पराजित हुआ था। इनमे सूत्र 8 और सूत्र 4 बड़े ही रोचक ढंग से सत्ताधारी यूपीए गठबंधन को परास्त करते हैं। विपक्ष ने 2011-12 के दौरान सूत्र 8 को बहुत ही बारीकी से निर्मित किया था और माहौल को अपने पक्ष मे करने में सफल हुआ था। सूत्र 4 के रूप में नवीन वलित आम आदमी पार्टी को तीसरे फ्रंट के रूप में स्थापित कर राजग ने संप्रग चौखाने चित कर दिया था।
इन समीकरणों की माने तो विपक्ष ने भारतीय राजनीति में बेहद शक्तिशाली समीकरणों का उपयोग किया है और एलन लिष्टमन के सूत्रों की रिवर्स इंजीनियरिंग करने में सफल हुआ है।
मौजूदा स्थिति को समझने की कोशिश करें तो इन सूत्रों के अनुसार 2019 में भी संप्रग लगभग हारा हुआ है और तीसरे फ्रंट को सत्ताधारी राजग कांटे में चारे की तरह उपयोग करने में कामयाब हो जाएगी।

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