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Poem

एक जग रोशन एक दर रोशन, दर-ओ-देहलीज का इंतज़ार रोशन, और दरवाजे की दीदार -ए -दरार रोशन...
मुझे गंगा में बहाने के बहाने आ जाओ | मेरी आखरी गजल मुझको सुनाने आ जाओ।। 

WELCOME TO WORLD OF MY POEMS, PEARLS OF WORDS SEARCHED BY MY HEART WITHIN MY SOUL! 

दिल को दिल से दिल की, 
एक बात बता दी जब तुमने 
पल भर में वो बरसों का 
सब गुस्सा वुस्सा छीन लिया

न नईं गजल न अफ़साने 
न शेर, नज्म न चौपाई 
धुन शाज़ पे ऐसा छेड़ दिया के 
सब नगमा वाग्मा चीन लिया 

क्या हीर-फरहा, क्या मीरा-किशन
क्या खुशबू, गुल, काँटों की चुभन  
यूँ टूट के हमने प्यार किया के 
सब किस्सा विस्सा छीन लिया 

फिर बंद पलक ने इश्क किया 
फिर दो रूह मुहोब्बत कर बैठीं 
कसमों से वफ़ा कर के हमने  
सब इसका उसका छीन लिया 

एक वरक़ में लिख डाली 
कई लाख हर्फ़ की नादानी
हर हुनर इल्म की महफ़िल से 
सब हिस्सा विस्सा छीन लिया 

:- जीतेन्द्र राजाराम 




मेरा परहेज की किसी भी जुर्म में दाखिल न हो ये दिल... 
मगर रंगरेज मेरा दिल, मेरी माने तो रभ माने। 
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एक वजूद सा उस दरख़्त के पास देखा है?

वो हवा से बिखरे हुए हसरतों के फूल चुनता है। 


एक जूनून सा तेरे भी दिल के साथ लिपटा है?

तेरे भी नब्ज़ में शायद अभी वो शूल जिन्दा है।


नियम को ताक में रखने की वो आदत खो गयी, शायद! 

हुनर से बेवफाई की अभी भी वो भूल जिन्दा है।


नहीं! हार के इस दुनिया से तो हम न जायेंगे,

हाँ! तेरी वो लड़कपने की जिद बेफजूल जिन्दा है।


सदियों का सौदा है दुश्मनी यूँ क़र्ज़ में लेना,

ब्याज तो खैर मरेगा कब? अभी तो मूल जिन्दा है। 


                           :-जितेन्द्र राजाराम र्मा 

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एक फ़रियाद ले के आया हूँ, 
मेरे जस्बात ले के आया हूँ। 

जो सुन ले तो कहूँ दिल की, 
एक बात ले के आया हूँ।

बा मुश्किल मिली हो तन्हा, 
तुम्हे कैसे जाने दूँ?
जो मिल न सका बरसों, 
वो मैं आज ले के आया हूँ। 

मना की अहल-ए-दुनिया, 
 बे-हिसाब बे-रहम है।
हो मुमकिन या न हो,
ये अल्लाह का करम  है।


इस लिए तो नहीं लाया, 
कंगन, काजल, लाली।
मुट्ठी में है गुलाल, एक ख़त,
और ये गुलाब ले के आया हूँ।



मिट्टी के धरातल में, मिट्टी का न हो जाऊं।
अब रात वही आये जिस रात मैं सो जाऊं।।

सुर सात सधे मेरे, वो सात सलंग फेरे ।
एक बूँद भी गर छलके मोती में पिरो जाऊं।।

बेबस सी लगी क्यों तुम, बरबस सी तेरी बातें ।
सब शेर, नजम, गज़लें गंगा में डुबो जाऊं।।

तू फिर अर्श नगीना हो, फिर वो क़र्ज़ चुकाना हो ।
फिर तुझसे मुहोब्बत हो, तुझे छोड़ के मैं जाऊं।।

मिट्टी का धरातल मैं, मिट्टी का न हो जाऊं।
अब रात वही आये जिस रात मैं सो जाऊं।।
:- जितेन्द्र  राजाराम 





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सूखे फूल सी माँ भी कोमल कलि सी नाराज होती है 
के मैं अब भी रूठ के रोता हु, मेरी भी शाम होती है।।

मेरी तो देह ही नहीं मालिन, मेरा तुम क्या बिगाड़ोगी,
टूट के तो फूल बिकते है, और महेक बदनाम होती है।।

मेरी सौ आरजू सी है तेरी चन्द लम्हें भरी नजरें,
जैसे किताबों में पड़ी सूखी कलि गुमनाम होती है।।

न जाने क्यों वो नहीं आते जिनकी याद आती है,
यूँ तो रोज खिली कलियाँ शब्-ए-गुलज़ार होती है।।



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मर्ज़-ए -मरहम में बातौर तेरा नाम लिखा है,
हकीम ने भी मेरी जान को मेरी जान लिखा है।।

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न हो नाराज तुमसे दुनिया 
तो नया क्या किया तुमने 
न करे कोई गिला शिख्वा 
तो भला क्या किया तुमने 
न कोई नज्म, न तराने नहीं गाये 
तो क्या हांसिल 
न तोड़े ख्वाब शीशों के 
तो सौदा क्या किया तुमने 
हयाई से लूटे लोगों से पूंछो 
सबब बेवफाई का 
बेवफाई को नहीं रौंदा 
तो वफ़ा क्या किया तुमने 
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New Poem From my book 'My Wise Countrymen' 

कतरा कतरा सा बह गया आखो के रास्ते...
बढ़ा के हाथ जिन्हें कोई पोछता भी है।

जान जाती है जान जाने से की वो जाने को है...
इतना अजीज दिल को कोई फरिस्ता भी है। 

चलते चले गए राहो में बे खबर...
न हुआ यकी, झ्हरोखों से कोई देखता भी है।

निगाहों में उतर आई तुम... स्याही में तेरी याद...
मुश्किल इन हालात में कोई आपसा तो है। 

रूठे तो हो मगर मेरे मनाने की गुमान में...
फासला हो न हो मगर बात कोई बेवजह तो है।  
                             :- जीतेन्द्र वर्मा 
                             From the book "My Wise Countrymen"  



Tum bhi to ek aag si ho, jo machal jaaogi to kya hoga
allhaad si ho, nadaan si, jo kal dhal jaaogi to kya hoga?

Jaha wale tere jism ko koi tista fareb kehte hai,
ho kali to hai uff ye adayein, jara khil jaogi to kya hoga?

Unsuljhi si, kuchh uljhi si yu chalti to balkha kha ke,  
jab julfon si mere daman se ulajh jaogi to kya hoga?

Itane bhi nahi hai gair ki humko iskadar maayus karo, 
thodi si umra aur hai jo meri ban jaaogi to kya hoga? 
                                                           
                                                                                                JV/29 Jan 2011
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Gar adatan tera sawaal wajib hai,
To fir fitratan mera jawaab wajib hai ||

Hai agar tu tere lihaaj me talkh,
To mere bhi adato ka ruaab wajib hai ||

Tu rahe mujhe pane ki umeed me jinda,
Yahi gaflatan mere ishq ka hisaab wajib hai ||
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wo ek se the, ya ek hi the, ya ek hone ko the, 
har haath, bichhadte saath ke saath... khone ko the...

yaadein maddhim si jali, lav bani, fir kalrav bani,
doobati shaam me shamaa ki tarah... sab rone ko the...

har syahi, har lafz, har ek ahd-e-wafa,
aansoo me, aanchal me, ya rumal me... sanjone ko the.... 

koi baat thi, koi saath thi, koi saath ki firaak me thi,
mogare se, maala se, moti se mere yaar... sab bikharne ko the...
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यूँ ही नहीं आया मुझे चलना मेरे यारों,
मैंने थामे थे वो हाथ जिनकी गोद में आया था!
है हसरत भरूं उड़ान उन निगाहों के आगे, 
जिनको अपनी सीखने की ख़ीज में रुलाया था!!

जितेंद्र वर्मा


kyu na meri bhi jindagi ka koi hal nikale, 
tere bin jeene ka bhi kuchh jatan nikage!

jab bhi roya teri maujudagi ke nisha pakar, 
haste haste nigaah-e-aansu chal nikale!!

kai sawal hai yu kahu to darmiyan-e-labh, magar 
aaj nikle jo koi alfaz to bas gajal nikale!

nahi maloom hua ird gird ke sannato ko bhi,
jab is duniya se hum oddh ke kafan nikale!!

                                                            : - JV


Ek ghadi wo thi, ek pal ye hai, ek lamha waisa bhi ayega
Waqt paani ki tarah ajnabi sa gujar jaeyga!

Nahi mumkin tha jiske bina ek pal bhi gujaara
Wo but bhi ek din mitti me badal jayega!

Aaj Patjhhad hai gulon ka khayal bhi mushkil hai
Baad barsaat ke foolon ka bhi mausam aayega!

Kyu na badlu mai chehra... naquaab ki tarah,
Jab mera saya bhi yuk naye badan me dhal jayega!

mere naseeb itni si de naseehat mujhko
kya waqt ke saath mera aalam bhi sambhal jayega?

:- Jitendra Verma



एक मौत मेरी भी होगी, सजी हुई दुल्हन की तरह
तिरंगे का घूँघट होगा, फूलों का गहना

चार कंधो में चढ़ी, सिमटी सी, मोगरे सी महेकती, 
मेरी भी विदाई होगी, सबकी आँखे नम होगी
मै लरजता सा, ठहरे पानी सा, शांत, शीतल

तिरंगे में अधखुला सा चेहरा, बंद आंखे, मुस्कान 
और जलसे में आये हर छोटे बड़े का सम्मान

वो होगा मेरे ससुराल का दरवाजा, 
न चावल की टोकरी होगी, न दिए की लव

यहाँ भी होगा ममता का असीम आंचल,
लाखों दीयों की ज्योति और अनंत तक फैला मेरा आंगन होगा,                                                                                                                                                                       
एक मौत मेरी भी होगी, सजी हुई दुल्हन की तरह
```` JV     



From now forever, oh my soul!
Manage, just manage to walk alone 

Fogs were those for just a while
Toys were just more fragile
Memories are your only demon!! 
Manage, just manage to walk alone 

Done with the dawn, gone sweet dusk
Lots of hopes and little fuss
Sands are left for forever bemoan
Manage... just manage to walk alone!!! 

Don’t widen lips for fake surreal
Dreams of days are never real
All are just a virtual clone
Manage... just manage to walk alone!!! 

Rhythms were in life, music were in clouds
All that melody turned cunning shouts
Stings now strings, jarring are eternal tone
Manage... just manage to walk alone!!! 

Sharing was fine, with little wine
Bliss in my life will never shrine  
All those pals turned golden stone
Manage... just mange to walk alone!!! 

Manage... just manage to walk alone!!! 
Hhhuuummm oh soul...........!! 




Jab bhi guajrati hai chhoo kar teri sada!! Mahek saanso me odh leta hu!!! 
Nahi aayi kaam kisi ke ye wafa!! ye keh kar mai daman chhod deta hu!!
Kabil hi nahi hum ki kar sake Jafa!! Mohobbat ka sabab hi ab tod deta hu!!! 





Mukhtalib hum bhi hai koi nadaaan nahi hai,
Haare hue hai hum magar beyimaan nahi hai…
Anchal me chhup gaye hain mere dil ke jakhm
Tum kehte ho hum ishq me kurban nahi hai!!!

1).
Hai kai masude kai afsaane hai pyar ke
Yu hi nahi kahlate hum diwane yaar ke
Kab talak takdeer roothengi lakeeron se,
Hum haatho ko saja denge mehndi-e-israr se

2).
Roshni ab bhi baaki hai darwajo ki ot rehne do,
Tum khud ko laga lo marham humari chot rehne do…
Beshak nahi hai koi tere mere darmiyaan,
Ye laffaaj hai zahaanwale jo chahe inhe kehne do




Jab jab chale tere saath,
hum befikar manjil se rahe!!

Saath ho kiye nakam kai toofan... Magar,
Bad Safar ke hum kisi kabil na rahe!

Badi mushkil se kiya hai,
Sauda teri judaai ka!!! 

Rahe yaadein umrabhar,
Chahe kuchh Haasil na rahe!!


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ये इश्क है इश्क कोई गुनाह नहीं है!
मेरी तुझपर कोई बेगैरती निगाह नहीं है!!

तू हुस्न है, बेखबर है दुनिया के तमाशों से,
जहाँ वालो के जुल्म से तू आगाह नहीं है!!

तेरी खूबसूरती है मेरे महबूब मै जिसका कायल हूँ,
जलने वालो कि जलन कि मुझे परवाह नहीं है!!

तुम मलका हो मेरे ख्वाब कि, अम्बर कि परी हो
हर शै है रंक तेरा कोई शहंशाह नहीं है!!!


                           

दर्द दरारों का नहीं प्यार का हो गया,
कुछ नशा इस कदर खुमार सा हो गया!

वो सुर्ख होंठों कि हसी थी जिसके जानिब में,
मै संजीदा और बेक़रार सा हो गया!
क्यों ना लुटता मै रिश्तों कि बे हयाई में, 
मुझको भी जरा उसपर ऐतबार सा हो गया!

नहीं होता इस तरह का दोखा अक्सर मुझे 
यारो एक पल को मै भी वफादार सा हो गया!

ये दरारें नहीं है मेरी टीस है जहाँ वालो, 
एक फिर मै मेरे दोस्तों का गुनाहगार सा हो गया! 

                                              :- जितेंद्र वर्मा

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lab ne kiya hai ijhaar khusi ka, 
aankho ne chhalak ke bagawat ki hai!!

Maine masroof meri jindagi 
teri yaado ki badolat ki hai!!

purani tasveer me teri parchhai si aa giri,
fir se dil me dil-ke-chhalo ne sajawat ki hai!!

----                                     :- जितेंद्र वर्मा 


yakeenan wo thi meri aaknho ki faramoshi, 
nahi to unko kya ghhoorna jo dil me bas gayi ho!!



Mehfil ki jid thi ke ho gaye lafz jaya, 

warna wo hotho se kya kehna jo nigaaho ne kah diya ho!!



----                                     :- जितेंद्र वर्मा 



जीने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
पीने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
मै लड़खड़ा कर चलू तो आकार थाम लेते है....
कमबख्त गिरने-संभलने भी नहीं देते अपने हिसाब से!
लेकर आये है सब शोले, माटी और पानी मेरे जनाजे में...
बे-मुरीद मरने भी नहीं देते अपने ईमान से!!

:-जीतेन्द्र वर्मा



छुपके घूंघट से दिखी मेरी होठों कि हंसी तुमको,
जरा भि उठाती नजर तो मेरे आँशु दिख गए होते!

ना मिलाते तुम जो मुझे अपना कह के अपनों से,
तो कबके तेरी महफ़िल से बन के बेगाने चले गए होते!

ना भटके हम फकीरों से, ना गिरो ने उछाले पत्थर,
वरना हुम भि ज़माने में दीवाने कहे गए होते!

तड़प तेरी जुदाई कि अगर मेरे चेहरे पे झलक जाती,
तो हम भि चंद किताबो कि कहानी बन गए होते!

जो खबर होती यही महफूज़ है हाथो कि लकीरों में,
तो क़त्ल कर के हम अपना कबके दोजख चले गए होते!!

:-जीतेन्द्र वर्मा
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यु अर्ज़ कर फ़र्ज़ के कर गुजरी बाया करते है!
हमें भि आपसी कई बे फिकरी दिया करते है!
ज़माने भर के लोगो यही तोहमत मलि मुह पे,
हर एक सांस को मेरी आखरी कहा करते है!

:-जीतेन्द्र वर्मा



Mumkin hai me mere wajood pe tamge chadha do tum,
Munasib hai mere naam me tohmat laga do tum..

mai to masroof hu mere gunaaho ki saja yaftaai me,
tumko bhi haq hai ek saja aur badha do tum...

har kar-gujri meri mere khuda ke haq me hai dosto,
mere mubarak karam ko chahe jo bhi bana do tum...

maine kab ki shikayat tere bartaao ko lekar ai dost,
ye bhi to nahi kehta ki mera hasra sabko bata do tum...

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भीड़ भाड़ कि धक्का मुक्की, में ये शहर बड़ा आबाद रहा।
सायकल, गच्छी, सीठी, घंटी, छुप छुप के संवाद किये।
अब आँखों की अठखेली का, न वो हुनर रहा न उन्माद रहा।
कुछ मीठा मीठा छूट गया, कुछ कड़वा कड़वा साथ रहा। 
उसके आने जाने तक का, जाने क्या क्या याद रहा।
- जितेंद्र राजाराम


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