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संघ प्रमुख के मंशा वाचा और कर्मणा में फर्क है

अधिकार को भीख में देने की अनुशंशा कर रहें हैं संघ प्रमुख। बराबरी में लाने के लिए जहाँ सम्मान से जीने के अधिकार दिये जाने चाहिए वहाँ जुल्मियों से जुल्म कम करने की गुहार को हमपर एहसां की तरह लाद रहे हैं। ये गुहार ही है, क्योंकि अत्याचारी वर्ग (सिर्फ वो लोग जो अत्याचारी हैं, हर किसी को ओफेण्ड होने की जरूरत नहीं है।) अपने मुखिया से न्याय परक बातों को आदेश के रूप नहीं लेता। मुखिया को गिड़ गीड़ाना पड़ता है। भेड़ियों का सरदार भेड़ियों से मिमियाने के लिए आदेश नहीं दे सकता, उसको मिमियाना पड़ता है। मुखिया वही कर रहे हैं।

देश की आजादी के दौर में हम रोटी कपड़ा मकान के संघर्ष से शुरू हुए, फिर बिजली पानी और सड़क की लड़ाई लड़ते हुए आगे बढे और शिक्षा स्वास्थ और रोजगार की लडाई के लिए तैयार हो ही रहे थे कि आज औंधे मुह गिर पड़े हैं। देश फिर से रोटी कपड़ा मकान को तरस रहा है। कहाँ एकता, अखंडता और बंधुता से शुरू हुआ ये देश अब गाय गोबर और गोमूत्र में सन् गया है।

संघ प्रमुख के विचारों में ही भारत के अतिवादी बहुसंख्यक की मनसा, वाचा और कर्मणा में भेद दिखाई देता है। ये भेद आज की घटनाओं के हर विमर्श में झलकता है।

जैसे ईरान और कर्णाटक में जारी विवाद के कैनवास को छोटा कर देना। रुपए के अवमूलन पर प्रधानमंत्री के पुराने तर्कों पर कुतर्क पेश करना। रिजर्वशन और सब्सिडी के फर्क को खत्म कर ews कोटा लाना। गाँधी और घोडसे दोनो की उपासना करना। बुद्ध के देश में बुद्ध को नकारना। हर विषय मैं जनता को गुमराह करना। ईरान की महिलायें सत्ता द्वारा थोपी हुई शर्त के खिलाफ लड़ रहीं हैं। कर्नाटक की लड़कियाँ भी सत्ता द्वारा थोपी गयी शर्त के खिलाफ लड़ रहीं है। अपने धर्म के खिलाफ तो वो इस बरक् ही जीत गयी थी की स्कूल पढ़ने आ गयी। अब अगर सत्ता के आगे झुक गयी और धर्म के दबाव ने स्कूल जाने से रोक दिया तो आजादी के बाद से पाँच पीढ़ी का संघर्ष मिट्टी हो जायेगा। और यही सत्ता चाहती है। आजादी की सभी उपलब्धियों को ध्वस्त करना। संविधान को, आरक्षण को, सम्मान से जीने के अधिकार को, शिक्षा को, सब को ध्वस्त करना ये कहते हुए की विकास हो रहा है। धर्म और पाखंड के नाम पर उकसाते हुए ये सत्ता हमको रोटी रोटी का मोहताज करना चाहती है।

संघ पोषित सरकार का हुनर ये है कि हफ़्तों की भूख के गलें में एक निवाला सूखी रोटी ठूंस के फूल पेज इस्तेहार छाप देती है कि देखो हमारे पराकृमि परिधानमंत्री ने देश पर कितना बड़ा अहसान किया है। इस अहसान का बदला चुकाना है। तैयारी करिये।।

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