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सूचना तंत्र की शक्ति

9 अरब प्रकाश वर्ष दूर किसी तारामंडल से धरती में रेडियो संदेश प्राप्त हुआ है। सोचिए, कल को आप जीवन और मृत्यु का रहस्य जान जाएं तो आप उस ज्ञान का क्या कराने? किसी न किसी को सूचित करेंगे? सूचना ही हमारी चेतना का पहला और अंतिम लक्ष्य है।

भारत में ज्यादातर लोग एलोन मस्क को तब से जानते हैं जब से उसने ट्विटर को खरीद लिया। 2014 में जब मैंने एक इंजीनियरिंग कॉलेज में उद्यमिता पर वर्कशॉप की थी तब मैंने एलन मस्क का एक कोट पढ़ा था। "हम 1980 के दशक में पैदा हुए लोग स्पीलबर्ग की फिल्मों के साथ ये स्वप्न देख रहे थे कि 21वीं सदी में लोग उड़ने वाले जूते पहनेंगे, चांद और धरती में रोज का आना जाना होगा, लेकिन फेसबुक, ट्विटर जैसे कॉर्पोरेशन ने हमारी चेतना को चंद शब्दों का गुलाम बना दिया"।

अंतरिक्ष जितने महत्वकांक्षी व्यक्ति से मैं तब भी प्रभावित हुआ था जब थाईलैंड की गुफा में फंसे कुछ बच्चों को निकालने के लिए एलन खुद अपनी ईजाद की हुई पनडुब्बी से जाने को तैयार हुए थे। लेकिन ये क्या, लोकप्रिय होने की ललक ने उनको ट्विटर खरीदने पर मजबूर कर दिया? वही ट्विटर जिसकी वो भर्त्सना करते थे?

क्या है, कि अमीर लोग समाचार चैनल या सोशल मीडिया को कंट्रोल करना चाहते हैं? क्यों? क्योंकि दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार है, संवाद की शक्ति। दुनिया में ऐसे कई गुणी और ज्ञानी लोग हैं, जिनके करिश्माई ज्ञान को दुनिया आज भी नहीं जानती। सत्ताओं के ऐसे कई काले चेहरे हैं, जिनको नकाब करने के व्यापक सबूत होने के बाद भी लोगों तक वो सबूत नहीं पहुंच पाते। कोरोना का टीका, अगर सिर्फ लैब में बना के अस्पतालों तक भेज दिया गया होता तो आजतक 10% लोग भी टीका नहीं लगवा पाते। दर असल, किसी भी ज्ञान या समाधान को विकसित करने और जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए व्यापक संवाद तंत्र की जरूरत होती है। किसी झूठ को सच, किसी सच को झूठ साबित करने के लिए व्यापक संवाद तंत्र की जरूरत होती है।

आज धर्म, विज्ञान से अधिक प्रचलित है। आम लोग आज भी अस्पतालों से ज्यादा ढोंगी, टोटकों पर ज्यादा विश्वास रखते हैं। आज भी कंप्यूटर खरीदकर लोग उसमें धार्मिक प्रवचन ही सुनते हैं। क्योंकि, धर्म और पाखंड की संवाद तंत्र, विज्ञान के संवाद तंत्र से अधिक शक्तिशाली और प्रभावशील है। विज्ञान को अपने ज्ञान पर घमंड हो जाता है, लेकिन धर्म लगातार अपना प्रचार करता रहता है।

21वीं सदी में, यदि किसी भी कौम, संस्था, संघ या समुदाय को अपनी हैसियत बढ़ानी है, तो उसे अपने सूचना तंत्र पर काम करना होगा। विज्ञान उड़ने वाले जूते बना लेगा, चांद से धरती में रोज का आना जाना भी शुरू हो जायेगा। लेकिन, इस सबको जनता के बीच ले जाने के लिए व्यापक सूचना तंत्र की आवश्यकता होगी।

वही इस सदी में राज कर सकेगा, जिसके पास, जनता से सीधे संवाद करने की ताकत और तरकीब होगी।

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